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गेहूं उपजाने की विधि।

23 सितंबर 20247
गेहूं उपजाने की विधि।

गेहूं (Triticum aestivum) एक प्रमुख अनाज की फसल है जो दुनिया भर में व्यापक रूप से उगाई जाती है। यह भारत में भी खाद्य सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण फसल मानी जाती है। गेहूं से आटा तैयार किया जाता है, जो रोटी, परांठे, ब्रेड, बिस्कुट और कई अन्य खाद्य पदार्थों का मुख्य घटक होता है।

Wheat

परिचय:

गेहूं (Triticum aestivum) एक प्रमुख अनाज की फसल है जो दुनिया भर में व्यापक रूप से उगाई जाती है। यह भारत में भी खाद्य सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण फसल मानी जाती है।
गेहूं से आटा तैयार किया जाता है, जो रोटी, परांठे, ब्रेड, बिस्कुट और कई अन्य खाद्य पदार्थों का मुख्य घटक होता है।

जलवायु और मिट्टी:

  • जलवायु:
    • गेहूं की खेती के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त होती है।
    • बिहार में अक्टूबर से नवंबर का समय बोआई के लिए सबसे अच्छा होता है, क्योंकि इस समय तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है।
  • मिट्टी:
    • गेहूं की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
    • मिट्टी का पीएच स्तर 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

बीज चयन:

उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए जैसे कि:-

  • HD 2967
  • PBW 343
  • K 9107, आदि।
इन किस्मों को बिहार के जलवायु के लिए उपयुक्त माना गया है।
बीज की शुद्धता और अंकुरण क्षमता सुनिश्चित करें। प्रति हेक्टेयर 100-120 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

भूमि की तैयारी:

  • भूमि की अच्छी तरह से जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
  • 2-3 बार जुताई करके पाटा चलाना चाहिए ताकि मिट्टी में नमी बनाए रखी जा सके।
  • खेत को समतल और जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।

बोआई:

  1. बोआई का समय: नवंबर के पहले सप्ताह से मध्य दिसंबर तक।
  2. बोआई की विधि:
    • सीधे पंक्तियों में ड्रिल विधि का उपयोग करें।
    • पंक्तियों के बीच 20-22 सेमी की दूरी रखें और बीजों को 4-5 सेमी की गहराई पर बोएं।

खाद और उर्वरक:

  • 10-12 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालें।
  • उर्वरक का प्रयोग करें: 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस, और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालें।
  • बोआई के समय आधा नाइट्रोजन और पूरा फॉस्फोरस और पोटाश दें। बाकी नाइट्रोजन को दो बार (पहली सिंचाई और दूसरी सिंचाई के बाद) दें।

सिंचाई:

  1. पहली सिंचाई 20-25 दिन बाद करें।
  2. दूसरी सिंचाई फूल आने के समय करें।
  3. तीसरी और चौथी सिंचाई दूध अवस्था और दाना भरने के समय करें।
  4. कुल 4-5 सिंचाइयां आवश्यक होती हैं।

निराई-गुड़ाई:

  • फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए 2-3 निराई करें।
  • फसल की बेहतर वृद्धि के लिए निराई आवश्यक है।

कीट एवं रोग प्रबंधन:

  1. रस्ट: यह एक आम रोग है, इसके लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें और उचित फफूंदनाशकों का उपयोग करें।
  2. दीमक: दीमक से बचाव के लिए बीज उपचार करें और समय पर सिंचाई करें।
  3. कंडुवा रोग: इसके लिए रोगमुक्त बीजों का चयन करें।

कटाई:

  • जब फसल पूर्ण रूप से पक जाए और दाने कठोर हो जाएं तो कटाई करें।
  • फसल को सूखने के बाद मड़ाई करें।

भंडारण:

  • मड़ाई के बाद दानों को अच्छी तरह से सूखा लें।
  • गेहूं को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखें। अगर भंडारण लम्बे समय के लिए करना हो तो कीटनाशक का प्रयोग करें।

उत्पादन:

  • उचित प्रबंधन और देखभाल के साथ, प्रति हेक्टेयर 4-5 टन गेहूं का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

पोषण का महत्व(Nutritional value )

  • गेहूं के पोषण मूल्य (100 ग्राम गेहूं के दाने के आधार पर) इस प्रकार हैं:
  • पोषण मूल्य (100 ग्राम गेहूं के दाने के आधार पर)
    ऊर्जा लगभग 327 कैलोरी
    कार्बोहाइड्रेट 71.2 ग्राम
    फाइबर 12.2 ग्राम
    शर्करा 0.4 ग्राम
    प्रोटीन 12.6 ग्राम
    वसा 1.5 ग्राम
    संतृप्त वसा 0.3 ग्राम
    मोनोअनसैचुरेटेड वसा 0.2 ग्राम
    पॉलीअनसैचुरेटेड वसा 0.6 ग्राम
    Vitamins (विटामिन्स):
    विटामिन B3(नायसिन) 5.5 मिलीग्राम
    फोलेट (B9) 43 माइक्रोग्राम
    विटामिन E 1.0 मिलीग्राम
    Minerals (खनिज:)
    लौह 3.5 मिलीग्राम
    मैग्नीशियम 138 मिलीग्राम
    फॉस्फोरस 346 मिलीग्राम
    पोटेशियम 431 मिलीग्राम
    जस्ता 2.7 मिलीग्राम
    सेलेनियम 70 माइक्रोग्राम
  • गेहूं में फाइबर, प्रोटीन और विभिन्न विटामिन और खनिजों की उच्च मात्रा होती है, जो इसे एक पौष्टिक अनाज बनाते हैं।
  • यह ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और इसके नियमित सेवन से स्वास्थ्य को कई लाभ हो सकते हैं, जैसे पाचन में सुधार, हृदय स्वास्थ्य में वृद्धि और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना।