Ganga
KGangakoshi Logoshi

किसान का अपना साथी

सूरजमुखी उपजाने की विधि।

23 सितंबर 20247
सूरजमुखी उपजाने की विधि।

सूरजमुखी (Helianthus annuus) एक महत्वपूर्ण तिलहन फसल है, जिसे मुख्य रूप से इसके बीजों से तेल निकालने के लिए उगाया जाता है। यह पौधा अपनी बड़ी और चमकीली पीली पंखुड़ियों वाले फूलों के कारण आकर्षक होता है, और इसका नाम "सूरजमुखी" इसलिए पड़ा क्योंकि इसका फूल सूरज की दिशा में घूमता है।

Sunflower

परिचय:

सूरजमुखी (Helianthus annuus) एक महत्वपूर्ण तिलहन फसल है, जिसे मुख्य रूप से इसके बीजों से तेल निकालने के लिए उगाया जाता है।
यह पौधा अपनी बड़ी और चमकीली पीली पंखुड़ियों वाले फूलों के कारण आकर्षक होता है, और इसका नाम "सूरजमुखी" इसलिए पड़ा क्योंकि इसका फूल सूरज की दिशा में घूमता है।
सूरजमुखी के बीजों में लगभग 40-50% तेल होता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
यह तेल खाना पकाने, सौंदर्य प्रसाधनों, और औषधीय उत्पादों में इस्तेमाल होता है।
सूरजमुखी का पौधा कम समय में तैयार हो जाता है और इसे विविध प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है।

मिट्टी और जलवायु:

  1. मिट्टी: सूरजमुखी के लिए दोमट, बलुई दोमट, और जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
    • मिट्टी का pH 6.0-7.5 के बीच होना चाहिए।
  2. जलवायु: यह गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह से विकसित होता है।
    • 20-25°C का तापमान इसके अंकुरण के लिए आदर्श है, जबकि फूल आने के समय 25-30°C तापमान सबसे अच्छा माना जाता है।

बीज चयन:

उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीजों का चयन करें। कुछ लोकप्रिय किस्में हैं:

  • NSSH-104
  • Morden
  • Surya
बीज को बोने से पहले 2-3 ग्राम फफूंदनाशक (जैसे कि थिरम या कैप्टन) से उपचारित करें।

बुवाई का समय और विधि:

  1. बुवाई का समय:
    • रबी मौसम: फरवरी-मार्च
    • खरीफ मौसम: जून-जुलाई
  2. बुवाई की विधि:
    • पंक्ति की दूरी: 45-60 सेमी
    • पौधे की दूरी: 30-40 सेमी
    • बीज की गहराई: 3-5 सेमी

खाद और उर्वरक:

  1. गोबर की खाद: प्रति हेक्टेयर 10-15 टन।
  2. रासायनिक उर्वरक:
    • नाइट्रोजन (N): 50 किलो
    • फास्फोरस (P): 60 किलो
    • पोटाश (K): 40 किलो
नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और बाकी 30 दिन बाद देना चाहिए।

सिंचाई:

  • प्रथम सिंचाई: बुवाई के 15-20 दिन बाद।
  • दूसरी सिंचाई: फूल बनने के समय।
  • तीसरी सिंचाई: बीज बनने के समय।
बारिश की कमी की स्थिति में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सिंचाई करें।

खरपतवार प्रबंधन:

  • फसल के पहले 30-40 दिनों तक खेत को खरपतवार से मुक्त रखें।
  • जरूरत पड़ने पर खरपतवारनाशी का प्रयोग करें, जैसे कि पेन्डीमिथलीन (1.0-1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर) बुवाई के तुरंत बाद।

रोग और कीट प्रबंधन:

  1. रोग:अल्टरनेरिया ब्लाइट, रस्ट, डाऊनी मिल्ड्यू से बचाव के लिए रोगरोधी किस्मों का उपयोग करें और खेत को साफ-सुथरा रखें।
  2. कीट:सफेद मक्खी, एफिड्स, और कैटरपिलर से बचाव के लिए नीम का तेल या जैविक कीटनाशक का उपयोग करें।

फसल कटाई:

  • पकाई की पहचान: जब फूल सूखने लगे और बीज काले रंग के हो जाएं।
  • कटाई का समय: सूरजमुखी की फसल 90-100 दिनों में पक जाती है। जब पौधे के पत्ते पीले हो जाएं और सिर नीचे की ओर झुक जाएं, तब कटाई करें।
  • कटाई के बाद: सिर को 5-6 दिनों तक धूप में सुखाएं और फिर थ्रेशिंग करें।

भंडारण:

  • सूरजमुखी के बीजों को साफ और सूखा लें, ताकि इनमें 8-10% से अधिक नमी न रहे।
  • भंडारण के लिए साफ और सूखी जगह का चयन करें, ताकि बीज लंबे समय तक सुरक्षित रहें।

उत्पादन:

सही तरीके से की गई खेती से प्रति हेक्टेयर 15-20 क्विंटल सूरजमुखी का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

उपयोग:

सूरजमुखी के कई उपयोग होते हैं, जो इसे एक बहुउपयोगी फसल बनाते हैं। इसके मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं:

  1. तेल उत्पादन: सूरजमुखी के बीजों से सूरजमुखी का तेल निकाला जाता है, जो खाने के लिए उपयोगी होता है। यह तेल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें उच्च मात्रा में पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं।
  2. खाद्य पदार्थ: सूरजमुखी के बीजों का उपयोग स्नैक्स, सलाद, और मिठाईयों में किया जाता है। इसे भूनकर नमकीन के रूप में भी खाया जाता है।
    सूरजमुखी के बीजों को पीसकर आटे में मिलाया जा सकता है, जिससे पोषण में वृद्धि होती है।
  3. पशु चारा: सूरजमुखी की खली, जो तेल निकालने के बाद बचती है, का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है। यह प्रोटीन और ऊर्जा का अच्छा स्रोत होता है।
  4. औषधीय उपयोग:सूरजमुखी के तेल का उपयोग कई औषधीय उत्पादों में किया जाता है। यह त्वचा के लिए फायदेमंद होता है और इसे मॉइस्चराइज़र के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
    सूरजमुखी के बीजों में विटामिन ई, मैग्नीशियम, और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
  5. बायोडीजल उत्पादन:सूरजमुखी के तेल का उपयोग बायोडीजल उत्पादन में भी किया जाता है। यह पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का एक स्रोत है।
  6. शोभाकारी पौधा:सूरजमुखी को इसकी सुंदरता और आकर्षक पीले फूलों के कारण बागवानी और सजावट के लिए भी उगाया जाता है। इसे बगीचों और घरों में शोभा बढ़ाने के लिए लगाया जाता है।
  7. मिट्टी संरक्षण:सूरजमुखी के पौधे की गहरी जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करती हैं और मिट्टी की संरचना में सुधार करती हैं।
  8. शहद उत्पादन:सूरजमुखी के फूलों से मधुमक्खियां शहद एकत्रित करती हैं। यह शहद पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
  9. तेल की मात्रा:सूरजमुखी के बीजों में लगभग *40-50%* तक तेल होता है। सूरजमुखी का तेल हल्का, स्वच्छ, और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (मुख्य रूप से लिनोलिक एसिड) से भरपूर होता है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
  10. प्रोटीन की मात्रा:सूरजमुखी के बीजों में *20-25%* तक प्रोटीन होता है।
    तेल निकालने के बाद बची हुई खली में लगभग *30-40%* प्रोटीन होता है, जो पशु चारे के रूप में उपयोगी है।